डेंगू का आयुर्वेदिक उपचार

डेंगू का आयुर्वेदिक उपचार


डेंगू बुखार होने के कारण


        ये तो हम जानते ही है की ये बीमारी मच्छर के काटने से होती है पर जब किसी व्यक्ति को डेंगू हो और उसे कोई मच्छर काट ले तो उस मच्छर में भी इस बीमारी का वायरस चला जाता है और ऐसे में अगर वही मच्छर किसी और व्यक्ति को काट ले तब वो भी इस वायरस से संक्रमित हो जाता है।


        डेंगू के लक्षण 


       अगर शुरुआत में ही डेंगू के लक्षण पता चल जाए तो समय रहते इस बीमारी से बचा जा सकता है। डेंगू का रोग तेज बुखार होने से शुरू होता है और इसके साथ सिर दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में भी दर्द होता है। इसके इलावा शरीर पर लाल लाल चकते भी बन जाते है। पेट खराब हो जाना, पेट में दर्द, कमज़ोरी, चक्कर आना, दस्त, भूख ना लगना भी डेंगू के लक्षण है।


     एलोवेरा, गेंहू का ज्वारा, गिलोय और पपीते के पत्ते। इन सबको मिला कर इन का रस पीने से डेंगू में चमत्कारी ढंग से फायदा मिलता है। ये उपाय चिकनगुनिया का इलाज में भी काफी उपयोगी है। अगर ये सब चीज़े ना मिले तो गिलोय का पानी दिन में 3 बार पिये, इससे भी डेंगू के उपचार में फायदा मिलता है।


       सुबह शाम घी या फिर या शहद में गिलोय का रस मिला कर पीने से खून की कमी दूर होती है।


      थोड़ी सी गिलोय पीस ले और उसमें 5 से 6 तुलसी की पत्तियां मिला कर 1 गिलास पानी में उबाल कर काढ़ा बना ले और मरीज को पिलाये। इसके इलावा 2 से 3 चम्मच एलोवेरा रस पानी में मिला कर रोजाना पिए तो बहुत से बीमारियों से बचे रह सकते है। इसमे पपीते के पत्तों का रस मिला कर पीने से प्लेट्लेट जल्दी से बढ़ते है। डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ़्लू के उपचार में उत्तम आयुर्वेदिक उपाय है।


     • अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है। यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है।
     • पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है। उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में दो से तीन बार दें, एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी।
     • गिलोय बेल की डंडी ले, डंडी के छोटे टुकड़े करे। उसे दो गिलास पानी मे उबालें, जब पानी आधा रह जाये तो ठंडा होने पर काढ़े को रोगी को पिलायें। मात्र 45 मिनट बाद cells सेल्स बढ़ने शुरू हो जाएँगे!
    • गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में दो तीन बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है।
    • जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में तीन बार दें। 
    • यदि रोगी बार-बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा निम्बू मिलाकर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी।
    • नीम और तुलसी का काढ़ा 20 से 50 मिलीलीटर पीने से डेंगू में लाभ होता है।
    • करेले के रस में जीरा डालकर पीने से डेंगू में लाभ होता है।
    • रात्रि में पुराने गुड़ के साथ जीरा खाने से डेंगू में लाभ होता है।
    • अदरक और किश्मिश का काढ़ा पीने से डेंगू में लाभ होता है।
    • अमरूद दिन में तीन बार खाने से डेंगू में लाभ होता है।
    • यदि रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है, तब भी यह (उक्त) चीज़ें रोगी की बिना किसी डर के दी जा सकती
हैं।


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