अक्षरों का प्रभाव

सृस्टि में अक्षरों के प्रभाव से मूल प्रकृति में  विकार / निर्माण निम्न प्रकार होता है । आप बोलो या परमात्मा दोनों का प्रभाव एक समान होता है ।
अ- सब, पूर्ण, व्यापक, अव्यय, एक, अखण्ड, अभाव, शून्य।
इ- वाला (जैसे मकानवाला) गति, निकट। 


ए- नहीं गति, गतिहीन, निश्चल, पूर्ण, अव्यय। 
उ- ऊपर, दूर, वह, तथा और आदि।


ओ- अन्य नहीं, वही, दूसरा नहीं।
ऋ- सत्य, गति, बाहर।
 लृ -सत्य, गति, भीतर। 
, ञ, न, ङ, छ- नहीं, अभाव, शून्य।


, ह- निश्चय, अन्त, अभाव, संकोच, निषेध।
क- बाँधना, बलवान, बड़ा, प्रभावशाली, सुख। 
ख- आकाश, पोल, खुला, छिद्र।'
ग- गमन, हटना, स्थान छोड़ना, पृथक् होना।
घ- रुकावट, ठहराव, एकाग्रता।
च- फिर, पुनः, बाद, दूसरा, अन्य, भिन्न, अपूर्ण, अङ्गहीन, खण्ड
छ- छाया, आच्छादन, छत्र, परिच्छद, अखण्ड आदि।
ज- पैदा होना, जन्म लेना, उत्पन्न होना, नूतनत्व, गति।
झ- नाश होना।
ट- मध्यम, साधारण, निर्बल, संकोच, इच्छाविरुद्ध।
ठ- निश्चय, प्रगल्भता, पूर्णता।
ड- क्रिया, प्रकृति, अचेतन, जड़।
ढ- निश्चित, निश्चल, धारित, चेतन।
त- तलभाग, नीचे, इधर, आधार, इस पार, किनारा, अन्तिम स्थान
थ- ठहरना, आधेय, ऊपर, उधर, उस पार।
द- गति, देना, कम करना।
ध- न देना, धारण करना, रख लेना।
प- रक्षा।
फ- खोलना, खुलना।
ब- घुसना, समाना, छिपना।
भ- प्रकट, जाहिर, बाहर, प्रकाश।
य- पूर्ण गति, जो, भिन्न वस्तु।
र- देना, रमण करना।
ल- लेना, रमण करना।
व- अन्य, पूर्ण भिन्न, अथवा, गति, गन्ध ।
ष- ज्ञान, श-प्रकाश, स-साथ, शब्द, वह।
क्ष- बन्ध ज्ञान, अज्ञान, निर्जीव, नाश, मृत्यु।
त्र- नीचे तक जाना, कुल देना, सब देना, कुल, सब, सर्व, समग्र।
ज्ञ- अजन्मा, नित्य, कर्म, ज्ञान।
ळ- वाणी।


इसलिये हिंदी/ संस्कृत  की वर्णमाला को देवनागरी ( ईश्वर की भाषा ) लिपि कहा गया है , ये वैज्ञानिक भाषा है । बाकी सभी भाषा मूल भाषा का  बिगड़ा हुआ रूप है । यदि जगत में बिगड़ा हुआ रूप उपयोग होगा तो प्रदूषण ही होगा ।


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