आध्यात्मिक चर्चा-पिछली चर्चा में हमने समझा कि आत्मा को कर्म करने के लिए साधन के रूप में शरीर प्राप्त होता है। आत्मा रथी है, शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है, मन लगाम है, दश इन्द्रियाँ घोड़े हैं। यहां अभी हम केवल इस प्रसंग को विस्तार देते कि शरीर प्रकृति से बनता है और इसको समझने लिए रथ के स्थान पर (आज के समय में) गाड़ी को लेते हैं (रथ = गाड़ी)।

आध्यात्मिक चर्चा-


         पिछली चर्चा में हमने समझा कि आत्मा को कर्म करने के लिए साधन के रूप में शरीर प्राप्त होता है। आत्मा रथी है, शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है, मन लगाम है, दश इन्द्रियाँ घोड़े हैं।


       यहां अभी हम केवल इस प्रसंग को विस्तार देते है कि शरीर प्रकृति से बनता है और इसको समझने के लिए रथ के स्थान पर (आज के समय में) गाड़ी को लेते हैं (रथ = गाड़ी)।


         हम गाड़ी खरीद कर लाते हैं, चलाते रहते हैं, खराव हो जाने पर मैकेनिक से ठीक करा लेते हैं और फिर चलाते रहते हैं। लेकिन एक दिन ऐसा भी आता है कि जब मैकेनिक कहता है कि अब आपकी गाड़ी ठीक नहीं होगी बहुत पुरानी हो गयी है या ठीक होने लाइक नही है अब इसे बेचकर नयी ले लीजिए। पुरानी गाड़ी कबाड़े वाले को देदेते हैं और नयी गाड़ी


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