फिटकरी के 10 तरीके

2 रुपए की फिटकरी को 10 तरीकों से ऐसे करें उपयोग


       फिटकरी को अंग्रेजी में एलम कहते है। ये असल में पोटेशियम एल्युमिनीयम सल्फेट है। इसमें कई प्रकार के औषधीय गुण होते है। आयुर्वेद में इसे कई रोगों में उपयोग किया जाता है। यह रक्तशोधक और रक्तस्तम्भक है। ये एंटीसेप्टिक और एंटी बैक्टीरियल की तरह भी काम करती है। फिटकरी लाल व सफेद दो प्रकार की होती है। दोनों के गुण लगभग समान ही होते हैं। सफेद फिटकरी का ही अधिकतर प्रयोग किया जाता है। यह संकोचक अर्थात सिकुड़न पैदा करने वाली होती है। शरीर की त्वचा, नाक, आंखे, मूत्रांग और मलद्वार पर इसका स्थानिक (बाहृय) प्रयोग किया जाता है। रक्तस्राव (खून बहना), दस्त, कुकरखांसी तथा दमा में इसके आंतरिक सेवन से लाभ मिलता है।


 


आगे जानिए फिटकरी के बेहतरीन उपयोग :-


– यदि पसीना ज्यादा आता हो तो नहाने के पानी में फिटकरी घोलकर नहाएँ। पसीना आना कम हो जाएगा।
– चेहरे की झुर्रियाँ मिटाने के लिए फिटकरी के टुकड़े को पानी में डुबोकर चेहरे पर हल्के हाथ से मलें। सूखने पर सादा पानी से धो लें। कुछ ही दिनों में झुर्रियां मिट जाएंगी।
-मसूड़ों से खून आता हो तो फिटकरी को पानी में घोल कर के कुल्ला करने से ठीक होता है।
– जहरीला कीड़ा या बिच्छू काट ले तो पानी में फिटकरी का पाउडर डालकर गाढ़ा घोल बनाकर लगाने से आराम मिलता है।
– दांत में दर्द हो तो फिटकरी और काली मिर्च बराबर मात्रा में पीस कर इसे दर्द वाले दांत के मसूढ़े पर लगाएं। इससे दर्द कम हो जाता है।
– शरीर पर लगी छोटी चोट से खून बह रहा हो तो फिटकरि का पाउडर चोट पर छिड़कने से ब्लीडिंग बन्द हो जाता है।
– फिटकरी मिले पानी से कुछ दिन सिर धोने से जुएँ खत्म हो जाते हैं।
– बवासीर में फिटकरी का पाउडर मक्खन में मिलाकर मस्सों पर लगाने से बहुत लाभ होता है।
– नाक से खून आने पर फिटकरी के घोल में रुई डुबोकर नाक में लगाने से ख�


Popular posts from this blog

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।