कुरआन के नामकरण में गफलतबाजी




 
        मुस्लिम विद्वान जलालुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी पुस्तक तफसीर इत्तिकान में कुरआन और सूरतो के नाम के सम्बन्ध में चर्चा की है ,कि खुदावन्द ने अपनी पुस्तक के नाम उनके विपरीत रखे |


        इसी पुस्तक में कुरआन के ५५ नाम लिखे है – तफसीर इत्तिकान ,प्रकरण १७ पेज १३२-३४
मुजफ्फरी के अनुसार अबूबकर ने कुरान को जमा किया तब लोगो ने इसका नामकरण करने को कहा तो किसी ने इंजील कुछ ने सफर नाम सुझाया लेकिन अबूबकर ने इब्ने मसूद के प्रस्ताव से नाम मुसहिफ़ रख दिया |
इसी प्रकार इब्ने अश्त्ता किताबुल मुसहिफ़ में मूसा बिन अकवा के आधार पर इब्ने शहाब की रवायत की अबू बकर ने सम्मति से मुसहिफ़ नाम रखा |


         व्याख्याकार लिखता है कि अबूबकर वह प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने कुरआन को संकलित कर उसका नाम मुसहिफ़ रखा |
– तफसीर इत्तिकान ,प्रकरण १७ पृष्ठ १३७


        इस विषय पर हमने कुरआन के ५५ नाम फिर अबू बकर द्वारा मुसहिफ़ नाम रखना बताया अगले पोस्ट में इस विषय पर अन्य प्रमाणों के साथ कुरआन के नाम का कौल लिखेंगे | इन बातो से यह स्पष्ट है कि अबूबकर तक मुसलमान कुरआन का नाम ही निश्चय नही कर पाए थे ,और अगली पोस्ट में स्पष्ट करेंगे कि कुरआन का कुरआन नाम यहूदियों से लिया गया है | जिस पुस्तक का नाम ही निश्चय करना इतना मुश्किल रहा वो भला ईश्वरीय ग्रन्थ कैसे स्वीकार जा सकता है |  



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