ईश्वर ने ही समस्त जगत को बनाया है

       ईश्वर ने ही समस्त जगत को बनाया है जिसमें प्राणी और वनस्पति जगत भी सम्मिलित है. परमात्मा ही जगत का उत्पत्तिकर्ता, रक्षक, पालक एवम् पोषक है. वह परमात्मा स्वरूप से सर्वातिसूक्ष्म, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी व सर्वशक्तिमान है. हमारी आंखे बहुत सूक्ष्म और बहुत दूर की वस्तुओं को नहीं देख सकती. परमात्मा को हम अपनी ज्ञान की आंखों अर्थात् ज्ञानयुक्त बुद्धि से चिन्तन-मनन कर देख सकते हैं. प्रत्येक रचना में रचनाकार के गुण व प्रतिभा निहित व परिलक्षित होती है. हम पुस्तक को पढ़कर उसके लेखक के ज्ञान व बुद्धि का प्रत्यक्ष करते हैं. इसी प्रकार परमात्मा द्वारा रचित इस विशाल ब्रह्मांड को देखकर उसके विविध गुणों और क्षमताओं का प्रत्यक्ष ज्ञान होता है. सिद्धांत है कि रचना को देखकर रचियता का ज्ञान होता है. यह ज्ञान भी प्रत्यक्ष कोटि का ही होता है. अतः ईश्वर अपने रचना विशेष गुणों से ज्ञानियों को प्रत्यक्ष है. अज्ञानी लोग ही ईश्वर के दिखाई न देने की अविवेकपूर्ण बातें करते हैं. उनसे बुद्धिमान लोगों को भ्रमित नहीं होना चाहिए. ओ३म् शम्।


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