ईश्वर के सभी जीवात्माओं पर अनंत उपकार हैं

       ईश्वर के सभी जीवात्माओं पर अनंत उपकार हैं, अतः सभी मनुष्य आदि प्राणियों को ईश्वर की प्रतिदिन प्रातः व सायं उपासना करनी चाहिए. जीव कर्म करने में स्वतंत्र और फल भोगने में परतंत्र है. ईश्वर की उपासना करना श्रेष्ठ कर्म सिद्ध होता है. जो मनुष्य ईश्वर की उपासना नहीं करता वह कृतघ्न होता है. वह ईश्वर प्रदत भक्ति रस के आनंद से भी वंचित रहता है और उसके परजन्म अर्थात् मृत्यु के बाद मिलने वाले सभी जन्म व जीवन बिगड़ते हैं. वह दुःखों से युक्त योनियों में गिरता है. वेद, योग दर्शन और ऋषि दयानन्द प्रणीत संध्या विधि से भक्ति व ईश्वर का ध्यान करने से सब मनोरथ सिद्ध होते हैं. हमारा जीवन वेदों के स्वाध्याय, ऋषि दयानन्द और आर्य विद्वानों के ग्रंथों के अध्ययन तथा देश और समाज हित के कार्यों में व्यतीत होना चाहिए. सन्ध्या उपासना से हमें ईश्वर का प्रत्यक्ष होने सहित उस का आशीष एवम् कृपा मिलती है. आज ही उपासना का व्रत लें और सत्यार्थप्रकाश तथा पंचमहायज्ञ-विधि का अध्ययन करें. इनके करने से सुनिश्चित लाभ अर्थात् धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होगी. ओ३म् स्वस्ति.


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