दिनेश चंद्र गुप्ता

दिनेश चंद्र गुप्ता



8 दिसम्बर का दिन भारतमाता को दासता की बेड़ियों से मुक्त कराने के अपने प्रयासों के तहत क्रांतिकारियों द्वारा अंग्रेजी सरकार के मन में दहशत उत्पन्न करने के लिए कलकत्ता के डलहौजी स्क्यूयर में स्थित सेकेट्रीएट बिल्डिंग राइटर्स बिल्डिंग पर किये गए हमले को याद करने का दिन है|


8 दिसंबर 1930 को यूरोपियन लिबास में तीन युवा क्रांतिकारी दिनेश चन्द्र गुप्त, विनय बसु और बादल गुप्ता कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश कर गए और जेलों में भारतीय कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले इन्स्पेक्टर जनरल ऑफ़ प्रिजन एन.एस. सिप्सन को मार गिराया|


फिर क्या था, ब्रिटिश पुलिस और तीन युवा क्रांतिकारियों में गोलीबारी शुरू हो गयी जिसमें कई अन्य अधिकारी भी गंभीर रूप से घायल हुए| लम्बे संघर्ष के बाद पुलिस उन पर हावी होने लगी| गिरफ्तार ना होने की इच्छा के चलते बादल गुप्ता ने पोटेशियम साइनाइड खा लिया और मृत्यु का वरण किया जबकि विनय और दिनेश ने अपनी ही रिवाल्वार्स से खुद को गोली मार ली|


दोनों को अस्पताल ले जाया गया जहाँ विनय की 13 दिसंबर 1930 को मृत्यु हो गयी पर दिनेश को बचा लिया गया| उन पर मुकदमा चला कर उन्हें मौत की सजा सुनाई गयी और 7 जुलाई 1931 को 19 वर्ष की आयु में उन्हें अलीपुर जेल में फांसी दे दी गयी|


इन तीनों की शहादत ने कितने ही दिलों को झझकोरा और क्रांति का ये कारवां आगे बढ़ता गया| स्वतंत्रता के बाद दिनेश, विनय और बादल की स्मृति को अक्षुण रखने के लिए डलहौजी स्क्यूयर का नाम बदल कर इनके नाम पार कर दिया गया और आज इसे बी.बी.डी.बाग़ कहा जाता है। इन हुतात्माओं को शत शत नमन।


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