शुद्धि आन्दोलन


शुद्धि आन्दोलन


दयानंद सरस्वती द्वारा चलाये गये ‘शुद्धि आन्दोलन’ के अन्तर्गत उन लोगों को पुनः हिन्दू धर्म में आने का मौका मिला जिन्होंने किसी कारणवश इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। एनी बेसेंट ने कहा था कि स्वामी दयानन्द ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने कहा कि ‘भारत भारतीयों के लिए है। 1892-1893 ई. में आर्य समाज में फूट पड़ गई। फूट के बाद बने दो दलों में से एक ने पाश्चात्य शिक्षा का समर्थन किया। इस दल में लाला हंसराज और लाला लाजपत राय आदि प्रमुख थे। इन्होंने 'दयानन्द एंग्लो-वैदिक कॉलेज' की स्थापना की। इसी प्रकार दूसरे दल ने पाश्चात्य शिक्षा का विरोध किया जिसके परिणामस्वरूप विरोधी दल के नेता स्वामी श्रद्धानंद जी ने 1902 ई. में हरिद्वार में एक ‘गुरुकुल कांगड़ी’ की स्थापना की। इस संस्था में वैदिक शिक्षा प्राचीन पद्धति से दी जाती थी। इससे स्वामी श्रद्धानंद, लेखाराम और मुंशी राम आदि जुड़े थे।



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