स्वामी श्रद्धानंद - संस्था ,साहित्य एवं संगठन के अद्भुत निर्माणकर्ता

स्वामी श्रद्धानंद - संस्था ,साहित्य एवं संगठन के अद्भुत निर्माणकर्ता


          स्वामी श्रद्धानंद जी गुरुकुल शिक्षा पद्यति के समर्थक थे जबकि लाला लाजपत राय कॉलेज शिक्षा पद्यति के समर्थक थे। स्वामी जी ने अपने उद्देश्य कि पूर्ति के लिए गुरुकुल कांगड़ी कि स्थापना कि जबकि लाला लाजपत राय डीएवी लाहौर के संस्थापक सदस्यों में से थे। दोनों के विचार एक रूप न थे। लाला जी को १९०८ के देश निकाले तथा मांडले कि सजा का अंग्रेजों के समक्ष सबसे तीव्र प्रतिक्रिया करने वाले स्वामी श्रद्धानंद ही थे। लाला जी पर स्वामी जी के कदम से गहरी छाप पड़ी। जब लाला जी स्वदेश लौटे तब स्वामी जी ने उन्हें गुरुकुल में आमंत्रित किया। गुरुकुल में भाषण देते समय कुछ लोगो ने एक समय गुरुकुल शिक्षा पद्यति के विरोधी रहे लाला जी से गुरुकुल के विषय में उनकी राय पूछी। लाला जी ने गहरी साँस लेते हुए उत्तर दिया कि डीएवी से मेरा सम्बन्ध कुछ ऐसा हैं जैसा एक पुत्र का पिता से होता हैं जबकि गुरुकुल से मेरा सम्बन्ध ऐसा हैं जैसा एक प्रेमी का प्रेमिका से होता हैं। यह थी स्वामी श्रद्धानंद जी कि अपने विरोधियों को जितने कि अदभुत कला जिसे व्यवहार में लाने वाला ही सच्चा संगठनकर्ता बन सकता हैं। आज आर्यसमाज को स्वामी श्रद्धानंद सरीखे संस्था ,साहित्य और संगठन निर्माण कर्ता कि आवश्यकता हैं।


डॉ विवेक आर्य


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