प्रेरक विचार

प्रेरक विचार


     सच का सामना हमे सामने आकर करना चाहिए, पीछे से नहीं। सच वह दर्पण है जो अपना चेहरा हमें दिखाता है और वह हमारा भी चेहरा ही देखना चाहता है, पीठ नहीं।


     जीवन की अवधि का पता नहीं होता, पर हमें करने के लिए जो काम मिला है, उसका हमें पता होना चाहिए। उसे हमने पूरा करना है। जीवन काल में यदि पूरा न भी हो तो भी संतोष होना ही चाहिए कि हमने श्रम और लगन में कोई कसर नहीं छोड़ी।


      चुनौतियों का सामना उनसे भाग कर नहीं जाग कर करना चाहिए।


      काम से डर कर, आत्महत्या कर जो जीवन को समाप्त करने की बात करते है, मैं समझता हूँ वह उन बच्चों जैसे है जो होमवर्क पूरा न करने पर टीचर की डांट से डर कर स्कूल से भागना चाहते हैं। चुनौतियां हमारी उस योग्यता और शक्ति से हमारा परिचय कराती है जो हमारे भीतर है, जिनसे स्वयं हमारा ही परिचय नहीं है।


 


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