कर्म कसौटी है

कर्म कसौटी है



      २. यदि ज्ञानेन्द्रियों में रोग हो-तो उन्हीं को देखा जाता है, और उन्हीं में औषधि डाली जाती है । परन्तु यदि शरीर में दोष हो-तो कर्मेन्द्रियों से पहचान, परीक्षा की जाती है-मूत्र देखने से, नाड़ी-हाथ देखने से, जीभ देखने से । एवं औषधि भी पेट (नाभि) में डालकर उपवार किया जाता है तब रोग दूर होता है । कर्म भी नाभि ह-संस्कार चक्र की, या शरीर चक्र की। जैसे शारीरिक रोग का निदान कर्मेन्द्रियों द्वारा किया जाता है ऐसे ही मानसिक आत्मिक रोग का निदान भी कर्म से ही हुआ करता है।


Popular posts from this blog

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।