एक बहिन का प्रश्न

एक बहिन का प्रश्न



         सन्ध्या में दो बार शन्नोदेवीमन्त्र क्यों बोला जाता है??
         सन्ध्या में शन्नो देवी मन्त्र दो बार इसलिए आता है क्योंकि
         यह मन्त्र कल्याण का है और कल्याण आंतरिक और बाह्य दोनों शुद्धियों पर निर्भर करता है। इसलिए शारीरिक शुद्धि के दोनों मन्त्र अंगस्पर्श और मार्जन मन्त्रों से पहले अथवा प्रारम्भ में बोलते हैं।
और मनसा परिक्रमा मन्त्र  जो मानसिक अर्थात् मन को पवित्र बनाने वाले 6 मन्त्र हैं जिसमें घृणा ईर्ष्या द्वेष के लिए किंचित् स्थान नहीं है।
         व दिशा अधिपति रक्षक प्रेरक के माध्यम से मन को शिवमय करना है। क्योंकि बिना शिवमय हुए शिव में ध्यान  लग ही नहीं सकता।
         मनुस्मृति में कहा है अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति मनः सत्येन शुद्धयति---
         मनसापरिक्रमा के छठे मन्त्र में श्वित्र शब्द उज्ज्वल होने के लिए ही संकेत करता है।


        योग दर्शन में भी महर्षि पतंजलि अष्टांग योग के दूसरे अंग नियम में शौच की बात करते हैं।


       अतः दोनों शारीरिक और मानसिक शुद्धियो  के प्रारम्भ में तन मन दोनों को शुद्ध करने यह मन्त्र दो बार बोला जाता है।



-आचार्या विमलेश बंसल आर्या फ्रॉम कोचीन


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