संग का रंग

संग का रंग



      जहां कोई बीमारी पड़ जाती है-प्लेग, ताऊनहैजा, मलेरिया आदि तो वहां की रखी हुई चीजें भी दूषित समझी जाती हैं । डाक्टर-हकीम लोग कहते हैं कि रोग के कीटाणु ओं (जर्स) का प्रभाव उन निकटस्थ वस्तुओं में घुस जाता है। ऐसे ही पवित्र वायुमण्डल, शुद्धस्थान-यज्ञशालाओं में जो जल और शेष यज्ञ का पवित्र भावनाओं से रखा हुआ होता है । और वहां शुभ-पवित्र विचारों और मन्त्रों द्वारा घिरे हुए स्थान पर जो वस्तु होगी-वह भी अवश्य उन पवित्र प्रभावों से प्रभावित होचुकी होगी। इसलिये वहां का जल, यज्ञ-शेष लोगों के लिये अमृत का काम देता है।


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