भक्त और बच्चे की जाति

भक्त और बच्चे की जाति



      पिछली रात तीन चार बजे मां को नन्हा गोद का बच्चा जगाता है कि मां दूध पिलावे । परन्तु भक्त को उसका प्यारा प्रियतम भगवान् पिछली रात ३-४ बजे स्वयं ही जगाता है। जिससे कि भक्त अपने प्रभु का अमृत रस पान करे । जैसे कभी-कभी बच्चे समय से पहले भी भूखा होने के कारण एक-दो बजे जगा देते हैं, चिल्लाकर मा को जगा देते हैं। ऐसे ही कभी भगवान् अपने भक्त को एक-दो बजे जगा देते हैं, उठा देते हैं विचित्र लीला भगवान् की है। बच्चा अपनी भूख मां को जतलाता है, परन्तु भगवान् अपने भक्त की भख को स्वयं जानता है । बच्चा तो कई बार जागता है पर मां की प्रेमभरी थपकी से फिर-फिर सो जाता है। परन्तु भक्त को जब भगवान् जगाता है, तब अपनी प्रेमभरी थपकी से आनन्द विभोर [अतिशय मग्न] कर देता है । बच्चा दूध से भूख हटाता है और थपकी से विश्राम पाता है । भक्त भक्ति से तृप्त और आशीर्वाद से शांत होता है-बच्चे को तो मां लोरी देती है जब वह बहुत रोता चिल्लाता है। परन्तु इधर भक्त भगवान् को लोरी सुनाता है, उसके गुणों के गीत गाता है जब प्रभु उसे रिझाता है। मां तो अपनी जान छुड़ाने के लिए भी बच्चे को थपकती और लोरी सुनाती है परन्तु भक्त अपने जागने के लिए लोरी सुनाता है।


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