भगवान राम कौरव पांडव और अन्य कई ऋषियों की वंशावली

भगवान राम कौरव पांडव और अन्य कई ऋषियों की वंशावली


             इस चित्र में भगवान राम कौरव पांडव और अन्य कई ऋषियों की वंशावली उनके दादा परदादा तक तो ठीक है। परंतु जो उत्पत्ति की बात कही है। वह शास्त्र सम्मत नहीं है क्योंकि सृष्टि निर्माण में जब परमात्मा सतोगुण रजोगुण तमोगुण से इस सृष्टि का निर्माण करता है। पूर्व सृष्टि में कृत अपने कर्मों के अनुसार उद्भिज - भूमि में उत्पन्न होने वृक्षादि 
स्वेदज - जल और पसीने से होने वाले खटमल मच्छर और जलजीव 
अंडज - अंडे से उत्पन्न पक्षी सरीसृप आदि और 
जरायुज - थैली गर्भाशय से उत्पन्न पशु और मनुष्य चार प्रकार की उत्पत्ति देखी जाती है। 
             इसमें मनुष्य की उत्पत्ति सृष्टि के आदि में अमैथुनी सृष्टि में होती है। जिसमें परमात्मा पृथ्वी को गर्भ बनाकर सहस्रों की संख्या में स्त्री पुरुषों को उत्पन्न करता है। सृष्टि में उत्पन्न हुए उन स्त्री पुरुषों में ही सर्वप्रथम 4 जीवात्मा जो अत्यधिक पवित्र और श्रेष्ठ आचरण और पूर्व जन्म चरित्र श्रेष्ठ संस्कारों के धनी थे। वे अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा इन चार को क्रमशः ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का ज्ञान परमात्मा ने दिया। उसी अमैथुनी सृष्टि में ही ब्रह्मा भी उत्पन्न हुए। उन चारों ऋषियों ने चारों वेदों का ज्ञान ब्रह्मा को दिया और ब्रह्मा ने उन सहस्रों स्त्री पुरुषों तक उस वेद ज्ञान को पहुंचाया। चारों वेदों का ज्ञान होने से बहुत सारे चित्रों में हम ब्रह्मा को के चार मुख वाला देखते हैं। वस्तुतः 4 मुख का कोई ऋषि नहीं होता। वह एक कला है।
             ब्रह्मा से ज्ञान प्राप्त करके सहस्रों ऋषि हुए जिन्होंने वेद मंत्रों का अपने जीवन में आत्मसात किया। एक-एक मंत्र को समझने के लिए अपना जीवन खपा दिया। आज भी वेद संहिताओं में उन उन मंत्रों के ऊपर स्मरणार्थ उन ऋषियों का नाम पाया जाता है। सृष्टि उत्पत्ति के सही प्रकरण को ठीक-ठीक समझने के लिये। सत्यार्थ प्रकाश के आठवें सम्मुलास को पढें।


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