ऐश्वर्य, मान, बुद्धि

ऐश्वर्य, मान, बुद्धि



      ऐश्वर्य (धन) मान (इकबाल-प्रतिष्ठा) बुद्धि (अक्ल) किन कर्मों का फल हैं ? ये तीनों वस्तुएं मनुष्य के लिए ही हैं । जो विशेषता ममुष्य में (पशु से) परमात्मा ने बनाई है--उसका ही यह फल हो सकता है ।


      (१) पशु दान, त्याग, सेवा, संकल्प से नहीं कर सकता। मनुष्य ही ऐसा कर सकता है। इसलिए दान का फल ऐश्वर्य सम्पत्ति है।


      (२) और जन-सेवा का फल मान (इकबाल) प्रतिष्ठा इज्जत, हकूमत (शासन) है। 


      (३) बुद्धि दो प्रकार की होती है-एक प्राकृतिक, दूसरी आध्यात्मिक यह बुद्धि यज्ञ द्वारा मिलती है। ब्रह्मयज्ञ (प्रभुभक्ति-गायत्री आदि के जाप कि ध्यान) से उत्तरोत्तर आध्यात्मिक बुद्धि प्राप्त होती है। और अग्निहोत्र से अश्वमेध पर्यन्त यज्ञों से उत्तरोनर प्राकृतिक बुद्धि का विकास होता है।


Popular posts from this blog

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।