आये अभिमान ।

सदा रहे यही ध्यान।
बस हो जीवन ऐसा ,
सुख दुख में एक समान ।।


जिस मन में अभिमान रहता ।
साथ लहू के दंभ है बहता ।
गुण सारे छुप जाते उसके ,
लोभी जग है उसको कहता ।।


बंद होते नयन अभिमान में।
कटी पतंग जैसे आसमान में।
राह भटक जाता है राही भी,
बदल जाता मान भी अपमान में।।


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