आर्य समाज का दसवां नियम

आर्य समाज का दसवां नियम


          आज हम आर्य समाज के दसवें नियम पर विचार करेंगे। आर्य समाज का दसवां नियम यह है -  "सब मनुष्यों को सामाजिक सर्वहितकारी नियम पालने में परतंत्र रहना चाहिए, और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतंत्र रहें।"
          यह दो प्रकार के नियमों की चर्चा की गई है।
          एक नियम सामाजिक सर्वहितकारी है। और दूसरा नियम व्यक्तिगत हितकारी है
सामाजिक सर्वहितकारी नियम  वह नियम है, जिससे संपूर्ण समाज अथवा राष्ट्र का हित होता है। संपूर्ण समाज अथवा राष्ट्र के हित के लिए हमें अपने व्यक्तिगत हित को त्याग देना चाहिए। और जहां केवल अपना व्यक्तिगत हित है उस नियम को पालने में हम स्वतंत्र हैं हम उसका पालन करें अथवा न करें। अर्थात इसका हानि लाभ मेरा व्यक्तिगत हानि लाभ है इससे राष्ट्र व समाज का कोई अहित नहीं हो रहा है। किंतु जहां समाज राष्ट्र का अहित होता हो वहां हमें परतंत्र रहना चाहिए। 
         उदाहरण के लिए हम इस प्रकार समझ सकते हैं कि मैंने अपने पूरे घर में झाड़ू लगाकर जो भी कूड़ा करकट एकत्रित किया  हुआ है। मैं स्वतंत्र हूं अपने घर में इस कूड़े का ढेर किसी भी स्थान पर लगा सकता हूं। यहां पर मैं स्वतंत्र हूं। किंतु यदि इस कूड़ा करकट को हम एकत्रित करके बाहर ले जाते हैं तो वहां पर हम स्वतंत्र नहीं कि जहां मर्जी चाहे वहां हम इस कूड़े करकट को फेंक दें। वहां हमें बाध्य होना पड़ेगा। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, अथवा नगर निगम के द्वारा कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था की जाती है। हमें उसका पालन करना चाहिए। जहां नगर निगम, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत ने कूड़ा घर बना रखे हैं। वहीं पर हमें उस कूड़े करकट को डालना चाहिए। इसमें सभी का हित है। अर्थात सबके हित के लिए अपनी मनमर्जी का त्याग करना पड़ेगा। अपनी स्वतंत्रता का त्याग करना पड़ेगा।
 यदि हम इस नियम का पालन करते हैं तो इससे सबको बहुत  लाभ मिलता है। प्राय हम देखते हैं कि रेलवे फाटक पर जब ट्रेन आने वाली होती है, और फाटक बंद हो जाता है, तो दोनों तरफ से वाहनों की कई कई पंक्तियां लग जाती हैं। और जब फाटक खुलता है तो उस अफरा तफरी में वहां अक्सर जाम लग जाता है। घंटो घंटो सभी को वहां पर खड़े रहना पड़ता है। यदि हम इसी नियम का पालन करते हुए दोनों तरफ से केवल एक एक पंक्ति लगाएं चाहे कितनी भी लंबी हो तो फाटक खुलने के बाद एक दूसरे को निकलने में असुविधा नहीं होगी। और शीघ्रता से सुविधा पूर्वक हम अपने अपने मार्ग पर जा सकते हैं। यहां पर सामाजिक नियम प्रभावी होता है। और यहां पर हमें उस नियम का अवश्य पालन करना चाहिए तभी सर्वहित संभव भी है।


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