आर्य बनना धर्म का कार्य है

आर्य बनना धर्म का कार्य है


             अगर मुसलिम और ईसाई करण रोकना है तो सभी हिन्दू कहना शुरु कर दो कि गर्व से कहो हम आर्य है। जब तक यह रट लगाओगे की गर्व से कहो हम हिन्दू है, तब तक हिंदुओ का कत्लेआम भी होता रहेगा और धर्म परिवर्तन भी।
            आज तक कोई मुसलिम या ईसाई मिशनरियों की माँ ने ऐसा दूध नही पिलाया कि किसी आर्य का परिवर्तन कर दे या उसे नष्ट कर दे। 
             हिन्दु नाजूक है, हिन्दु बहका हुआ है, हिन्दु अंधविश्वासी है, हिन्दु शत्रूओ को भी अपना मानकर पूजा करने वाला है।
            हिन्दू ईश्वर पर कम और पत्थरो की मूर्तियों पर ज्यादा विश्वास करने वाला है।आर्य केवल सत्य सनातन वैदिक धर्म को ही धर्म मानने वाले है और हिन्दू सर्व धर्म कहकर अपने कातिलो को भी महान मानने वाले है।पीर,मजार,कब्रो पर भी माथा रगडने वाला है। हिन्दु ऊंच, नीच, छुआ छात, जाती पाती मे बंटा हुआ है।


            हिन्दुओ की एक उपासना,एक पूजा नही है।
           अलग अलग झंडो मे बंटा हुआ है। अलग अलग अपने अपने मंदिर बनाये बैठा है। आर्यो की एक ईश्वर  की उपासना है एक वैदिक सिद्धांत है।
         कह दो मिलकर सभी हिन्दू कि हम है आर्यो के वंशज, हम ईश्वर पुत्र है।


श्री कृष्ण, श्री राम और आर्य थे हनुमान।
एक सनातन धर्म है, जिसको कहते वेद।
हम एक ईश्वर के पुत्र है, सभी मिटायेंगे भेद।
आर्य बनकर ही हम देश, धर्म को बना और बचा पाएंगे।


          यदि संदेश सही लगे तो ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें ताकी हिन्दुओ को मुसलिम, ईसाई, कम्युनिष्ठो के कूचक्र से बचाया जा सके।


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