आत्मिक शक्ति सम्पन्न गृहस्थ (गीत)


आत्मिक शक्ति सम्पन्न गृहस्थ (गीत)


जिस नर में आत्मिक शक्ति है, अन्याय से झुकना क्या जानें।


जिस दिल में ईश्वर भक्ति है वह पाप कमाना क्या जानें।।


माँ, बाप की सेवा करते हैं, उनके दु:खों को हरते हैं।


वह मथुरा, काशी, हरिद्वार, वृन्दावन जाना क्या जानें।।


दो काल करें सन्ध्या व हवन, नित सत्संग में जो जाते हैं।


भगवान् का है विश्वास जिन्हें, दुख में घबराना क्या जानें।।


जो खोला है तलवारों से और अग्नि के अंगारों से।


रण भूमि में जाके पीछे वह कदम हटाना क्या जानें।।


हो कर्मवीर और धर्मवीर वेदों का पढ़ने वाला हो।


वह निर्बल दुखिया बच्चों पर तलवार चलाना क्या जानें।।


मन मन्दिर में भववान् बसा, जो उसकी पूजा करता है।


मन्दिर के देवता पर जाकर वह फूल चढ़ाना क्या जानें।।


जिसका अच्छा आचार नहीं, और धर्म से जिसको प्यार नहीं।


जिसका सच्चा व्यवहार नहीं, नन्दलाल का गाना क्या जानें।।


 


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